POCSO एवं एससी-एसटी एक्ट के मामले में मनीष चौबे दोषमुक्त
अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में रहा असफल, अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने की बचाव पक्ष की पैरवी
रायपुर। रायपुर स्थित अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय, फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय में विचाराधीन एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी मनीष चौबे, पिता पंकज चौबे, को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 20 अगस्त 2025 को पारित निर्णय में अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित नहीं कर पाने के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त किया गया। उक्त प्रकरण में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी ने पैरवी की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला कबीर नगर थाना क्षेत्र के अपराध क्रमांक से संबंधित था। प्रकरण में आरोपी मनीष चौबे के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(2), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 5 एवं 6 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2) एवं 5 के अंतर्गत आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के संबंध में न्यायालय में विचारण की कार्यवाही की गई।
अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका
आपराधिक न्याय व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करना आवश्यक होता है। केवल आरोप लगाए जाने से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं माना जा सकता। न्यायालय द्वारा मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन के पक्ष का परीक्षण किया जाता है तथा उसके बाद विधि के अनुरूप निर्णय पारित किया जाता है।
इस प्रकरण में भी अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल नहीं रहा। परिणामस्वरूप, माननीय विशेष न्यायालय ने आरोपी मनीष चौबे को दोषमुक्त कर दिया।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने की पैरवी
उक्त प्रकरण में आरोपी मनीष चौबे की ओर से अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी ने न्यायालय में बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व किया। प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन के आरोपों के विरुद्ध बचाव पक्ष की ओर से पैरवी की गई। अंततः माननीय न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय पारित करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
यह निर्णय इस महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत को रेखांकित करता है कि आपराधिक मुकदमे में अभियोजन पक्ष पर आरोपों को प्रमाणित करने का दायित्व होता है और दोषसिद्धि संदेह से परे प्रमाण के आधार पर ही की जा सकती है।
निर्णय दिनांक: 20 अगस्त 2025
बचाव पक्ष/आरोपी के अधिवक्ता: देव प्रसाद जोशी मोबाइल: 9893354327

