हत्या के मामले में किशन राजपूत और रोशन ध्रुव दोषमुक्त
तृतीय अपर सत्र न्यायालय रायपुर का फैसला, अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में रहा असफल
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने की पैरवी
रायपुर। हत्या के एक आपराधिक प्रकरण में माननीय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, रायपुर ने आरोपी किशन राजपूत एवं रोशन ध्रुव उर्फ शिवम को दोषमुक्त करने का निर्णय सुनाया। न्यायालय ने 20 अगस्त 2026 को पारित अपने निर्णय में अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाने के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इस प्रकरण में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने बचाव पक्ष की पैरवी की।
हत्या के आरोप में दर्ज था प्रकरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना मंदिर हसौद से संबंधित इस प्रकरण में आरोपी किशन राजपूत एवं रोशन ध्रुव उर्फ शिवम के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज किया गया था। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1) के साथ धारा 3(5) के अंतर्गत आरोप लगाए गए थे।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को न्यायालय के समक्ष संदेह से परे प्रमाणित करना था। हालांकि, अभियोजन पक्ष आरोपों को निर्धारित कानूनी कसौटी पर साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय सुनाया।
अभियोजन आरोप साबित करने में असफल
आपराधिक न्याय व्यवस्था में किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को संदेह से परे साबित करना आवश्यक होता है। केवल आरोप लगाए जाने या आपराधिक प्रकरण दर्ज होने से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता।
इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए हत्या के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असमर्थ रहा। न्यायालय ने प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों एवं विचारण के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय पारित किया।
अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने की बचाव पक्ष की पैरवी
इस प्रकरण में आरोपी किशन राजपूत एवं रोशन ध्रुव उर्फ शिवम की ओर से अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने न्यायालय में पैरवी की। बचाव पक्ष की ओर से आरोपियों का पक्ष प्रस्तुत किया गया। विचारण के उपरांत न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय सुनाया।
यह निर्णय आपराधिक न्याय व्यवस्था के उस महत्वपूर्ण सिद्धांत को रेखांकित करता है, जिसके अनुसार अभियोजन पक्ष पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है। जब आरोप निर्धारित कानूनी मानक के अनुरूप साबित नहीं हो पाते, तब न्यायालय को उपलब्ध साक्ष्यों और विधिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेना होता है।
प्रकरण का विवरण
न्यायालय: तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, रायपुर, जिला रायपुर, छत्तीसगढ़
पीठासीन अधिकारी: श्री शैलेश शर्मा
थाना: मंदिर हसौद
आरोपी: किशन राजपूत एवं रोशन ध्रुव उर्फ शिवम
आरोपित धाराएं: भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1) सहपठित धारा 3(5)
निर्णय दिनांक: 20 अगस्त 2026
बचाव पक्ष के अधिवक्ता: देव प्रसाद जोशी, मोबाइल नम्बर 9893354327
न्यायालय का निर्णय: दोनों आरोपी दोषमुक्त


