POCSO प्रकरण में रूपेंद्र कुमार धीवर उर्फ रिंकू धीवर दोषमुक्त
अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में रहा असफल, अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने की बचाव पक्ष की पैरवी
रायपुर। रायपुर स्थित अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय एवं फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (POCSO) द्वारा पारित निर्णय में थाना खरोरा के एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी रूपेंद्र कुमार धीवर उर्फ रिंकू धीवर को दोषमुक्त कर दिया गया। माननीय विशेष न्यायालय ने 4 जून 2026 को निर्णय पारित करते हुए आरोपी को भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) के अंतर्गत लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त किया। उक्त प्रकरण में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी ने पैरवी की।
थाना खरोरा में दर्ज अपराध से संबंधित था मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला थाना खरोरा के अपराध क्रमांक 435/2025 से संबंधित था। प्रकरण में आरोपी रूपेंद्र कुमार धीवर उर्फ रिंकू धीवर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 137(2), 87 एवं 64(2)(कथित उपधारा की पुष्टि आवश्यक) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 5 एवं 6 के अंतर्गत आरोप लगाए गए थे।
मामले की सुनवाई रायपुर स्थित अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय एवं फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय में हुई। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका
आपराधिक न्याय व्यवस्था का स्थापित सिद्धांत है कि किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करना आवश्यक होता है। केवल आरोप लगाए जाने के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय को मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन करते हुए विधि के अनुरूप निर्णय देना होता है।
इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। परिणामस्वरूप, माननीय विशेष न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी रूपेंद्र कुमार धीवर उर्फ रिंकू धीवर को दोषमुक्त कर दिया।
अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी ने किया बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व
इस प्रकरण में आरोपी की ओर से अधिवक्ता देवप्रसाद जोशी ने बचाव पक्ष की पैरवी की। मामले की न्यायिक कार्यवाही के दौरान बचाव पक्ष की ओर से आरोपी का प्रतिनिधित्व किया गया। अंततः माननीय विशेष न्यायालय ने 4 जून 2026 को निर्णय पारित करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
आपराधिक न्याय व्यवस्था में प्रमाण का महत्व
यह प्रकरण इस महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत की ओर ध्यान आकर्षित करता है कि आपराधिक मामलों में अभियोजन पक्ष पर आरोपों को प्रमाणित करने का दायित्व होता है। न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि तभी की जा सकती है, जब प्रस्तुत साक्ष्य विधि के निर्धारित मानकों को पूरा करते हों। यदि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहता है, तो न्यायालय को उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानून के अनुसार निर्णय करना होता है।
प्रकरण का विवरण
न्यायालय: अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय, फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (POCSO), रायपुर
थाना: खरोरा, जिला रायपुर
अपराध क्रमांक: 435/2025
आरोपी: रूपेंद्र कुमार धीवर उर्फ रिंकू धीवर
निर्णय दिनांक: 4 जून 2026
परिणाम: दोषमुक्त
बचाव पक्ष के अधिवक्ता: देवप्रसाद जोशी
मोबाइल: 9893354327

