Tuesday, September 8, 2026

POCSO के बढ़ते मामलों को रोकने की पहली जरूरत—अपराध के बाद नहीं, अपराध से पहले जागरूकता - अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी


 *POCSO के बढ़ते मामलों को रोकने की पहली जरूरत—अपराध के बाद नहीं, अपराध से पहले जागरूकता* - *अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी*


*बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार, स्कूल, पुलिस, प्रशासन और समाज को मिलकर बनानी होगी मजबूत व्यवस्था*


*विशेष लेख*


बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध समाज के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक हैं। ऐसे अपराध बच्चे के शरीर को ही नहीं, बल्कि उसके मन, आत्मविश्वास और भविष्य को भी प्रभावित करते हैं। बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के उद्देश्य से POCSO Act, 2012 बनाया गया है। कानून ने बच्चों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है, लेकिन केवल कठोर कानून और सजा के भय से ऐसे अपराधों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए अपराध की रोकथाम पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।


*बच्चा चुप नहीं, जागरूक होना चाहिए*


अपराध की रोकथाम की शुरुआत घर से होनी चाहिए। बच्चों को उनकी उम्र और समझ के अनुसार सुरक्षित एवं असुरक्षित व्यवहार की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्हें यह विश्वास होना चाहिए कि यदि कोई व्यक्ति उनके साथ अनुचित व्यवहार करता है तो वे बिना डर के माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दे सकते हैं।


सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे की शिकायत पर उसे डांटने या दोष देने के बजाय उसकी बात शांतिपूर्वक सुनी जाए और आवश्यकता होने पर समय पर उचित सहायता उपलब्ध कराई जाए।


*‘अजनबी से सावधान’ से आगे बढ़ना होगा*


बाल यौन अपराधों के संबंध में यह धारणा आम है कि खतरा केवल किसी अजनबी व्यक्ति से होता है। वास्तविक परिस्थितियों में बच्चा आरोपी को जानता-पहचानता भी हो सकता है। इसलिए बच्चों को केवल अजनबियों से सावधान रहने की सलाह पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपने शरीर, निजी सीमाओं और असहज परिस्थितियों के बारे में उम्र के अनुरूप जानकारी देना आवश्यक है।


*स्कूल बनें सुरक्षित स्थान*


बच्चे अपना महत्वपूर्ण समय विद्यालय में बिताते हैं। इसलिए प्रत्येक विद्यालय में प्रभावी Child Protection Policy, कर्मचारियों का उचित सत्यापन, सुरक्षित परिसर, शिकायत की व्यवस्था तथा बच्चों के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम होने चाहिए।


किसी बच्चे द्वारा गंभीर शिकायत किए जाने पर मामले को दबाने या केवल सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण चुप रहने के बजाय कानून के अनुरूप उचित कदम उठाना आवश्यक है।


*मोबाइल और इंटरनेट भी नई चुनौती*


डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा ऑनलाइन दुनिया से जुड़ गया है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और चैटिंग के माध्यम से बच्चों को बहलाने, धमकाने या अनुचित सामग्री साझा करने के खतरे मौजूद हैं।


अभिभावकों को बच्चों को साइबर सुरक्षा के बारे में समझाना चाहिए। बच्चों को अनजान व्यक्तियों के साथ निजी जानकारी, फोटो या वीडियो साझा करने के जोखिमों की जानकारी दी जानी चाहिए। किसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की स्थिति में उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और समय पर उचित प्राधिकरण को सूचना देना महत्वपूर्ण हो सकता है।


*कठोर कानून के साथ निष्पक्ष जांच भी जरूरी*


POCSO कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है और इसका प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। लेकिन प्रत्येक आपराधिक मामले में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।


किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए जांच एजेंसियों को मौखिक, चिकित्सकीय, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक परीक्षण करना चाहिए। वास्तविक पीड़ित बच्चे को न्याय मिलना चाहिए और निर्दोष व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी नहीं माना जाना चाहिए।


*समाज की चुप्पी अपराध को बढ़ावा दे सकती है*


सामाजिक बदनामी के डर से बाल यौन अपराधों को छिपाना समस्या को और गंभीर बना सकता है। यदि किसी बच्चे के साथ अपराध हुआ है तो परिवार को समय पर कानूनी, चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक सहायता लेनी चाहिए।


साथ ही मीडिया और सोशल मीडिया को भी अत्यंत संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। बच्चे की पहचान और निजता की रक्षा करना आवश्यक है। किसी लंबित मामले में बिना न्यायिक निष्कर्ष के किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से दोषी घोषित करना भी उचित नहीं है।


*रोकथाम के लिए सामूहिक अभियान की आवश्यकता*


POCSO मामलों की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर पुलिस, विद्यालयों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल संरक्षण इकाइयों, चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से नियमित Child Safety Awareness Campaign चलाए जाने चाहिए।


हमें केवल यह प्रश्न नहीं पूछना चाहिए कि अपराध होने के बाद दोषी को कितनी सजा मिलेगी; हमें यह भी पूछना होगा कि अपराध होने से पहले बच्चे को कैसे सुरक्षित रखा जाए।


बच्चों को जागरूक करना, परिवार में संवाद बढ़ाना, विद्यालयों को सुरक्षित बनाना, इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग की शिक्षा देना और शिकायत मिलने पर कानून के अनुरूप तत्काल एवं निष्पक्ष कार्रवाई करना—ये सभी कदम मिलकर बाल यौन अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


*सुरक्षित बचपन ही सुरक्षित समाज की पहचान है। POCSO कानून न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन जागरूक और जिम्मेदार समाज अपराध की रोकथाम की सबसे मजबूत दीवार है।*

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*अधिवक्ता, देव प्रसाद जोशी*

*सेशन कोर्ट, रायपुर, छत्तीसगढ़*

*मो.: 9893354327*

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